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पर हम ना होंगे . . .!!

नग्में तो होंगे   मेरी  इस  महफ़िल  मे  पर  हम  ना  होंगे ,
किस्से  मेरी  मोहब्बत  के  सुनायेगा  कोई ओर पर  हम  ना  होंगे.
चाहत  की  थी हमने  भी  उन्हे खुदा  मान के ,
चाहतो  के  चर्चे  तो  होंगे  पर  हम  ना  होंगे.
होगी  फिर  वही  रात  और  वही  होगी  चाँदनी ,
बस  उस  चाँदनी  के  दीदार  को  हम ना होंगे.
होता  अगर  बस  मे  मेरे  तो  मोहब्बत  उन्से  भी  करवा  लेते  ,
पर  इस  एहसास  को  जीने  के  लिए  अब  हम ना होंगे.
सोचा  था  अपना  भी  छोटा  सा  एक आशियाँ  होगा ,
लम्हे  होंगे  , बातें  होंगी ,
लम्हे  तो होंगे  तेरी  जिंदगी  मे  येह  सारे ,
बस  उन  लम्हो  मे  एक  हम  ना होंगे.

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आज भी है

आँखों में कुछ नमी आज भी है ,
तेरे ना होने की कमी आज भी है।
यु करके मोहब्बत भूल जाते है लोग ,
इस दिल में बेबसी आज भी है।
यु तोह तुझे पाने की चाहत आज भी है,
तेरी जुल्फोन में खो जाने की आरज़ू आज भी है।
पर अब न लौट के आएंगे ये वादा है ,
ज़िन्दगी का मोल अभी तेरी मोहब्बत से जायदा है।
रहते है कुछ लोग जिनके लिए जीने का इरादा है ,
क्यूंकि ज़िन्दगी का मोल अब 
तेरी मोहब्बत से जायदा है। 

अनकहीं बातें

मेरे  लफ़्ज़ों  के पन्नो पे कुछ  बात तोः है, यादों  की सांसो से मुलाकात तोः है। कुछ नग्मे है ,कुछ किस्से है, कुछ अपनों को खोने के ज़ज़्बात तोः है। पल पल बदलती इस दुनिया में , कुछ अनजाने से एहसास तोः है। फिर क्यों रह जाती है अनकही बातें , और क्यों होती है अधूरी मुलाकातें। क्यों होती है शाम सूरज ढलने के बाद , क्यों बिचरते है लोग मिलने के बाद। क्यों हर  मोहब्बत मुकम्मल नहीं होती, क्यों  बेवफाई की कोई वजह नहीं होती। यूही  नहीं मील जाते है लोग इस दुनिया में ,
उनके मिलने की वजह खुस खास तोह है।
ढलता है सूरज हर शाम को लौट जाने को , क्यूंकि हर  शाम के भी कुछ ज़ज़्बात तोः  है।
आज जो हम तुम साथ तोः है, कुछ यादें है , कुछ बातें है। कुछ अनकहे लफ़्ज़ों में सिमटे हुए पल , कुछ रिश्तों के अधूरे होने की बात तोह है। मेरे  लफ़्ज़ों  के पन्नो पे आज फिर से कुछ अनकही सी बात तोः है।